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पंकज चतुर्वेदी की रचनाएं



अतीत का इस्तेमाल
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सत्ता-पक्ष के बुद्धिजीवी 
विपक्ष की आलोचना करते हैं :
आज जो देश का हाल है 
वह इसी विपक्ष के 
कारनामों का नतीजा है 
क्योंकि पहले इनकी सरकार थी
और आज जो कुछ भी है 
भ्रष्टाचार, अन्याय, हिंसा :
क्या वह पहले नहीं थी 
बल्कि पहले तो अधिक ही थी
सरकार करना तो 
बहुत चाहती है 
पर सिस्टम इतना 
बिगड़ा हुआ मिला है 
कि उसे ठीक करने में 
बहुत वक़्त लगेगा
इस तरह लोकतंत्र में 
अतीत का इस्तेमाल 
उससे कुछ सीखने के लिए नहीं 
वर्तमान को सह्य बनाने के लिए 
किया जाता है
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असम्मानित 
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अपमानित करनेवाला
सोचता है
कि वह विजेता है
पर अपकृत्य वह
इसी कुंठा में करता है
कि उसका कोई
सम्मान नहीं है
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सौन्दर्य
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नदी गहन है करुणा से
उत्साह से गतिमान्
उसके प्रवाह का कारण
सजलता है
और इनकी संहति
उसका सौन्दर्य
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यह समय 
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यह समय
शांति का नहीं
भ्रांति का है
संवाद नहीं
विवाद का है
संयम नहीं
अधीरता का है
और जिन्हें सिर्फ़
शब्द ख़र्च करने हैं
उनकी वीरता का है
यह समय
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 पुरुषत्व एक उम्मीद
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मोबाइल आप कहाँ रखेंगे?
क़मीज़ के बायीं ओर
ऊपर जेब में?
तो दिल को ख़तरा है
कान से लगाकर रोज़ाना
ज़्यादा बात करेंगे
तो कुछ बरसों में
आंशिक बहरापन
आ सकता है
सिर के पास रखने से
ब्रेन ट्यूमर का अंदेशा है
टेलीकाॅम कम्पनियों के
बेस स्टेशनों के
एंटीना से निकलती ऊर्जा
कोशिकाओं का तापमान बढ़ाती है
बड़ों की बनिस्बत बच्चे इससे
अधिक प्रभावित होते हैं
मोबाइल के ज़्यादा इस्तेमाल से
याददाश्त और दिशा-ज्ञान सरीखी
दिमाग़ी गतिविधियों पर
व्यवहार पर
बुरा असर पड़ता है
ल्यूकेमिया जैसी ख़ून की बीमारी
हो सकती है
इसलिए डाॅक्टर कहते हैं:
कुछ घण्टे मोबाइल को
पूरे शरीर से ही
दूर रखने की आदत डालें
और अगर पैंट की जेब में रखेंगे
तो पुरुषत्व जा सकता है
इस पर एक उच्च-स्तरीय भारतीय संस्थान में
कुछ बुद्धिजीवी
अपने एक सहधर्मी के सुझाव से
सहमत और गद्गद थे
कि दिल भले जाय
हम तो पुरुषत्व को बचायेंगे
इस तरह मैंने जाना
पुरुषत्व एक उम्मीद है समाज की
जिसके पास दिल नहीं रहा.
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संस्कृत
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संस्कृत से पहली बार
मैं आकृष्ट तब हुआ
जब मेरे यहाँ एक मेहमान
खाना खाते समय
और कुछ लेने के
अनुरोध पर कहते :
''इच्छा नहीं है''
तब मुझे लगता था :
बड़ा हो जाने पर
मैं भी यह कहा करूँगा
अनिच्छा को जताने का
वह सर्वोत्तम ढंग
मालूम होता था
अब समय आ गया है
कि मैं वह कहूँ
पर कह नहीं पाता
सिर्फ़ याद आती है
कि ऐसे मुझे कहना था
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