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डिज़िटल इण्डिया बनाम डिज़िटल भारत: -डॉ.मोहसिन ख़ान



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डिज़िटल इण्डिया बनाम डिज़िटल भारत

-डॉ.मोहसिन ख़ान


भारत में टेलिविज़न का प्रारम्भ होना एक जनसंचार के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण स्थिति और डिज़िटल पहल की शुरुआत के बीज के रूप में मानी जानी चाहिए। मेरी दृष्टि में यही वह समय है, जब भारत में व्यावहारिक स्तर पर लोकतान्त्रिक रूप में उन्नत जनसंचार माध्यमों, सूचना क्रान्ति का सूत्रपात हुआ। बाद के दिनों में कई शहरों में दूरदर्शन केन्द्रों का शुभारंभ हुआ, धीरे-धीरे घर-घर टेलीविज़न आने प्रारम्भ हुए। फिर भी टेलीविज़न आम आदमी की पहुँच और सोच से बहुत दूर था, क्योंकि मुझे और मेरे भाई-बहनों को बड़ी ज़िल्लत उठाकर, उपेक्षित भाव का सामना सहते हुए पड़ोसी के यहाँ टेलीविज़न देखने जाना पड़ता था। हमारे मनोविज्ञान में यह स्पष्ट था कि हम अपने पड़ोसियों से दोयम दर्जे के और ग़रीब हैं, परंतु टेलीविज़न के मोह ने कभी चेतन्य रूप में यह बात हम पर हावी नहीं होने दी। समय धीरे-धीरे बीता और सूचना क्रान्ति, सूचना प्रौद्योगिकी ने समस्त जड़ताओं, बाधाओं, सीमाओं और असमानताओं को तोड़ते हुए सूचना क्रान्ति, सूचना प्रौद्योगिकी ने अपने क्षेत्र में प्रगति, उन्नति, विकास और तकनीकी सोपनों को पार किया और हम आज यहाँ तक आ पहुँचे कि पश्चिम के समकक्ष हैं और नहीं भी!!! 

व्यावहारिक, प्रायोगिक और जैविक स्तर पर यदि गणनात्मक रूप से विचार किया जाये, तो वास्तव में यह युग सूचना क्रान्ति, सूचना प्रौद्योगिकी के साथ अब डिज़िटलाइज़ेशन का युग है। सूचना क्रान्ति, सूचना प्रौद्योगिकी ने हमारे समस्त जीवन पर प्रभाव ही नहीं डाला है, बल्कि हमारी जीवन शैली, जीवन प्रक्रिया, विचारों, फ़िलसाफ़ी को काफ़ी सीमा में परिवर्तित भी कर दिया है, अब डिज़िटलाइज़ेशन से और भी अधिक मात्र में परिवर्तन आना स्वाभाविक है। सूचना प्रौद्योगिकी ने तो इस सदी में सबसे अधिक विकास किया है, आज विश्व को जितना सबल, सुलभ, समुन्नत और सशक्त बनाने में अन्य संसाधनों का महत्त्व है, उससे कहीं अधिक सूचना प्रौद्योगिकी का महत्त्व है। सूचना प्रौद्योगिकी ने ही विश्व-मानव को एक-दूसरे के निकट ला दिया है, जिससे उसकी भौगोलिक दूरियाँ ही समाप्त नहीं हुईं, बल्कि उसकी मानसिकता में भी परिवर्तन आया है और वह अब पहले से भी अधिक उदार, ज्ञानसम्पन्न, सभ्य, सहयोगी, समन्वयी, संकीर्णता से मुक्त, सुविधासम्पन्न और रचनाशील प्रवृत्ति से युक्त हुआ है। सूचना प्रौद्योगिकी तकनीकी शब्दावली युक्त ऐसी संकल्पना है, जो सूचनाओं के संजाल का नवीनतम तकनीक के माध्यम से विकास को रेखांकित करती है। भाषा के समस्त संरचनाओं का तकनीकीकरण सूचना प्रौद्योगिकी का एक अभिन्नतम अंग है। समस्त भाषिक संरचनाओं में तकनीकी सूत्र की स्थापनाएं करती हैं । इन्हीं लिपिगत संरचनाओं से किसी लिपि के विकास का मानदंड अधिनियमन होता है। 

सूचना प्रौद्योगिकी और डिज़िटलाइज़ेशन के इस दौर में भारत ने तेज़ी से कदम आगे बढ़ाए हैं और विश्व के साथ मिलकर विकास के अधुनातन आयामों पर नई तथा रचनात्मक दृष्टि से विचार करते हुए नवीन शक्ति से नए युग में प्रवेश किया है। जहां आधुनिकता के कई पहलू उन्नत हुए हैं और कई पहलू कमजोर सिद्ध होकर स्वत: ही ध्वस्त हो गए वहीं से उत्तर आधुनिकता का नया काल प्रारम्भ हो गया। इस काल में एक नई संकल्पना राष्ट्र में समय की मांग और विकास को सुनिश्चित करने लिए उभरी है। यह मांग डिज़िटल इण्डिया की मांग है। वास्तव में यह मांग केवल मांग नहीं, बल्कि समय के साथ विश्व सहयोग और वैश्विक विकास के लिए महापरिवर्तन और परिवर्धन की गहरी आवश्यकता का परिणाम है, जिससे राष्ट्र के उस पहलू को सशक्त बनाया जाए; जो कि वर्तमानकाल के लिए अपनी अहम भूमिका कई स्तरों पर निर्वाह सके। मेरा मानना है कि इस प्रकार के विकास के इस चरण में भारत डिज़िटल इण्डिया होने के शुरूआत ही हुई है और इस यात्रा में बहुत कुछ महापरिवर्तन तथा नए आयामों का सृजन होना अभी शेष है। डिज़िटल इण्डिया की परिकल्पना में नो सूत्र सामने आए हैं- 1. ब्रॉडबैंड हाइवे, 2. यूनिवर्सल एक्सेस टू फ़ोन, 3. सार्वजनिक इन्टरनेट एक्सेस प्रोग्राम, 4. ई-गवर्नेंस, 5. ई-क्रान्ति, 6. इन्फोर्मेशन फॉर ऑल, 7. इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, 8. आईटी फॉर जॉब्स, 9. अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम। इन बिन्दुओं में कई योजनाएँ समाई हुई हैं और यह समस्त संकल्पना भारत सरकार की योजना के तहत बन पाई हैं और इसका क्रियान्वयन भी किया जाने लगा है। इसी दृष्टि से डिज़िटल इण्डिया सप्ताह भी 1 जुलाई से भारत में मनाना प्रारम्भ हो गया है। जिसके तहत सरकार इस सप्ताह में सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं के बारे में बताया जा रहा है। सरकार इस सप्ताह में प्रत्येक वर्ष जागरूकता अभियान भी चलायेगी ताकि लोगों को समाज और देश के बारे सुगमता से पता चल पाये। केंद्र सरकार की तरफ से डिज़िटल लॉकर, ई-बस्ता समेत कई योजनाएं लागू की जाने वाली हैं। सरकारी काम का पूरी तरह से डिज़िटलाइज़ेशन हो जायेगा। डिज़िटल इंडिया सप्ताह के तहत देश के बड़े-बड़े ज़िलों में प्रचार वैन भी घूमेगी जो लोगों को सरकार के इस कार्यक्रम के बारे में बतायेगी। सरकार इस प्रोग्राम को यह कहकर प्रचारित कर रही है कि डिज़िटलाइज़ेशन के बाद हर किसी के हाथ में देश का शासन होना चाहिए उसी को डिज़िटल इंडिया कहते हैं। इस प्रोग्राम के तहत सरकार देश के गांव-कस्बों को भी इंटरनेट के जरिये जोड़ना चाहते हैं। इस कार्यक्रम के तहत साल 2019 तक देश के सारे काम कंप्यूटराइज्ड करने का लक्ष्य है। इस प्रोजेक्ट में कई सौ करोड़ों से ज्यादा रुपया ख़र्च होगा। 

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में इस महत्त्वकांक्षी योजना में केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारें भी सहयोग का रुख़ अपनाए हुए है। इस कार्यक्रम को पूरे देश में व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने समितियों का गठन किया है, जो कि इस दिशा में कार्य करती हुई निगरानी रखने के साथ समस्याओं और सुझावों पर भी अपनी सक्रियता बनाए रखेगी। यह बात सत्य है कि धीरे-धीरे इण्डिया डिज़िटल इण्डिया होता जा रहा है, लेकिन उस भारत का क्या होगा जो अब भी भारत कहलाता है। एक बड़ा अंतर डिज़िटल इण्डिया और डिज़िटल भारत में देखने को मिल रहा है और आगे भी यही स्थिति बनी रहने की आशंका है। इसका कारण यह है कि डिज़िटल इण्डिया में उस समुदाय की गणना की जाती है, जो कहीं न कहीं आर्थिक स्तर से मज़बूत, सुविधा सम्पन्न है अथवा वह सब ई-सुविधाओं का लाभ ले सकता है, जो मौजूदा दौर में उपलब्ध है, क्योंकि इन सुविधाओं की प्राप्ति के लिए आर्थिक स्तर से थोड़ा मज़बूत होना लाज़मी है। लेकिन डिज़िटल भारत तो उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जो अभी अपने जीवन का मूलभूत आधार रोटी, कपड़ा और मकान के लिए अनवरत संघर्ष कर रहा है और ऐसा समुदाय डिज़िटल इण्डिया के समुदाय से कहीं अधिक बड़ा और व्यापकता लिए हुए है। इस समुदाय में असंगठित मज़दूर वर्ग और छोटे किसानों के साथ वे अनजाने, अचिह्ने लोग हैं, जो महानगरों की बस्तियों में रह रहे हैं, वह लोग हैं जो अब भी आदिवासी जीवन जी रहे है, वह लोग हैं जो अब भी घुमंतू जीवन यापन कर रहे हैं। यह सत्य है कि एक बहुत बड़ा अंतर डिज़िटल इण्डिया और डिज़िटल भारत में कई स्तरों पर देखा जा सकता है। जहां एक तरफ़ शिक्षा के लिए डिज़िटलाइज़ेशन किया जा रहा है, वहीं गरीब जनता का एक बड़ा समुदाय शिक्षा से भी वंचित है। जिस देश में शिक्षा को शुल्क मुक्त शिक्षा अथवा फ़्री एजुकेशन नहीं किया जाए; वहाँ ऐसी योजनाएँ केवल एक खास समुदाय तक सिमटकर रहा जाती हैं। देश में बड़ी मात्रा में किसान खेती से हताश होकर आत्महत्याएँ कर रहे हैं और देश के बड़े उद्योगपति आसानी से ऋण लेकर उसे चुका न पा रहे हों और उनके साथ उदारतावश व्यवहार करते हुए, अमान्य सुविधाएं दी जा रही हों, वहाँ ऐसा डिज़िटल इण्डिया एक भेदभाव लेकर उभरता है। डिज़िटल इण्डिया बनाने के उपक्रम में और इस योजना के क्रियान्वयन में एक समस्या भ्रष्टाचार की भी समक्ष आ सकती है। इस प्रोजेक्ट हेतु कई स्तरों पर निविदाओं के आमंत्रण, ठेकेदारी प्रथा के तहत कई स्तरों पर भ्रष्टाचार होने की खुले रूप में आशंका हैं, क्योंकि जब कामनवेल्थ खेलों का भारत में आयोजन होता है वहीं भ्रष्टाचार का खेल भी खेला जाता है। क्या इस डिज़िटल इण्डिया के निर्माण में भ्रष्टाचार का सामना नहीं किया जाएगा? डिज़िटल इण्डिया के इस रचनात्मक कार्यक्रम में ई-कचरा भी एक समस्या बनकर उभरेगा, जिससे निबटना एक चुनौती के रूप में नज़र आ रहा है। ई-उत्पाद जिस गति से भारत में निर्मित हो रहा है, वह गति अत्यंत तेज़ है, लेकिन ई-कचरा से निबटान हेतु कोई सार्थक उपाए, योजना और कदम भारत में दिखाई नहीं दे रहे हैं। डिज़िटल इण्डिया का एक कमाल यह भी है कि इसमे कई कंपनियों को जो कि आई टी क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं, उन्हें सीधा आर्थिक लाभ पहुँचने वाला है और ऐसी कंपनियाँ कितनी भारतीय हैं या होंगी इस स्थिति को देखना बेहद आवश्यक हो जाता है। विदेशी कंपनियाँ सारा लाभांश एकत्रकर हमारी अर्थिकता को चुनौतियाँ देती हैं। अभी तो भारत में मोबाइल फ़ोन पर विदेशी और स्वदेशी कंपनियों ने अपने लाभांश को निरंतर सुरक्षित रखते हुए रोमिंग सुविधा ही फ़्री नहीं की है, तो ऐसी कंपनियों से डिज़िटल इण्डिया की आशा कैसे रखी जाए। केवल भारत संचार निगम लिमिटेड ने ही यह सुविधा उपलब्ध कराई है; क्योंकि यह एक सरकारी उपक्रम है। यहाँ एक और स्थिति का उल्लेख करना चाहूँगा कि जिस सीमा तक सरकारी या निजी कंपनियों ने इन्टरनेट कनेक्शन के लिए अपने दाम बढ़ा रखे हैं वे सब कभी भी भारत को उस स्तर पर डिज़िटल इण्डिया न होने देंगे जिसकी कि गहन आवश्यकता है। भारत सरकार की कोई की ऐसी कोई भी योजना नहीं जहां शैक्षणिक संस्थानों को इन्टरनेट की सुविधा मुफ्त उपलब्ध कराई जाए, न ही शोधकर्ताओं के लिए ही ऐसी कोई योजनाएँ हैं। दिल्ली में वर्तमान सरकार की तरफ से फ्री वाई फ़ाई सुविधा दी जाने की घोषणा है । नई दिल्ली का लुटियंस जोन एरिए को पूरी तरह से वाई फ़ाई फ्री बनाया जाएगा। लुटियंस जोन में लोकसभा के सभी 543 और राज्यसभा के सभी 250 सांसदों सहित करीब 900 बंगलों और लगभग 500 फ्लैट्स आते हैं; जो कि पूरी तरह से वाई फाई युक्त होंगे। अभी कुछ ही जगहों पर अजमेर में ख़्वाजा मोहीनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर कुछ दिनों पहले वाई फ़ाई की मुफ्त सुविधा उपलब्ध कराई है और दिनाँक 10/01/2016 को मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में वाई फ़ाई की सुविधा मुफ्त में सरकार ने उपलब्ध कराई है। आगे सरकारी योजना में 2500 से अधिक स्थानों पर मुफ्त वाई फ़ाई देने की योजना है। इसके अतिरिक्त दिल्ली के सरकारी और प्रयवेट कॉलेज में 1 GB तक फ्री वाई फ़ाई देने की भी घोषणा की गई है। वैसे चौंकाने वाली बात यह है कि भारत में अब भी 100 करोड़ लोग ऑनलाइन नहीं हैं। पिछले तीन वर्षों में एक योजना विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के स्तर पर आई थी कि न्यूनतम मूल्यों पर शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी अध्यापकों और विद्यार्थियों को न्यूनतम मूल्य पर टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। वह योजना भी अपने पूर्ण रूप में असफल रही। डिज़िटल इण्डिया उन सब माध्यमों का आदी होने के साथ बंध जाएगा जो इन माध्यमों का उपयोग करते हुए अपने कार्यों को अंजाम दे रहा है। इसके अतिरिक्त उसके पास कोई और मार्ग शेष रह ही न जाएगा, क्योंकि आने वाले समय में समस्त कार्य मैन्युअल न रहकर सबकुछ डिज़िटल माध्यम से ही हो जाएगा। एक बड़ा तबका तब भी ऐसी सुविधाओं से वंचित ही रहेगा और डिज़िटल इण्डिया का एक अनकहा गुलाम डिज़िटल भारत बन जाएगा। यदि उसे इस सुविधा का लाभ लेना है, तो महंगे दरों पर समस्त संसाधनों को ख़रीदना होगा नहीं तो उसे इससे वंचित ही रहना होगा। इस तरह एक भेद बढ़ जाने की आशंका है, डिज़िटल इण्डिया के लिए डिज़िटल भारत एक मज़दूर से अधिक कुछ न होगा। डिज़िटल भारत इन संदर्भों में कहा जाएगा क्योंकि वह भी डिज़िटल इण्डिया की डिज़िटलाइज़ेशन न्यूनतम किन्हीं आवश्यकताओं को ग्रहण करके चलेगा ही अथवा उसके जीवन का अंश बन ही जाएगा। उदाहरणार्थ मोबाइल को ही लिया जा सकता है, आज कई मज़दूरों के पास अच्छी-बुरी गुणवत्ता वाला मोबाइल अवश्य है। टचस्क्रीन मोबाइल चलाते हुए व्हाट्सअप्प तथा अन्य मोबाइल एप्स का उपयोग भी कहीं न कहीं कर ही रहा है। साथ ही वह ए. टी. एम. की सुविधाएँ ग्रहण करेते हुए वह अपने दैनिक जीवन में उसका निरंतर उपयोग कर रहा है, लेकिन यह समता विधायक तत्व के लिए नाकाफ़ी हैं, इस उपक्रम को व्यापक स्तर पर लेजाकर जनोपयोगी बनाते हुए न्यूनतम मूल्यों पर उपलब्ध कराना आवश्यक और अनिवार्य है।

डिज़िटलाइज़ेशन के इस दौर की शुरुआत में सोशल मीडिया का प्रयोग पहले पहल तो डिज़िटल इण्डिया के प्रयोगकर्ताओं ने करना प्रारम्भ किया और इसकी निरंतरता तथा वृद्धि लगातार बढ़ती चली जा रही है। मोबाइल एप्स चाहे वह व्हाट्सप्प हो, हाईक हो, चैट हो, मेसेंजर हो, टेलीग्राम हो या अन्य कोई एप्स हों सभी का उपयोग डिज़िटल इण्डिया के प्रयोगकर्ता बहुत अधिक संख्या में कर रहे हैं। संदेश, चित्र, वीडियो, ऑडियो बहुत तीव्र गति से इधर निरंतर प्रेषित जा रहे हैं। ऐसी जादुई चीज़ से समाज तुरंत जुड़ गया अब बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी इसके उपयोगकर्ता बन गए हैं। यह माध्यम समाज के लिए सीधे लाभदायक सिद्ध हो रहा है। फ़ेसबुक और ट्वीटर के प्रयोगकर्ताओं की संख्या में डिज़िटल इण्डिया के संकल्प के कारण बहुत अधिक वृद्धि हो पाई है, जिसके कारण कंपनियों में लाभांश हेतु आर्थिक प्रतियोगिता भी होने लगीं और ऊंचे दमों पर कंपनियों को टेक ओवर भी किया जाने लगा है। इस डिज़िटल इण्डिया के कार्यक्रम में सोशल मीडिया और उसके उपयोगकर्ताओं को सीधा लाभ पहुँच रहा है। इधर मोबाइल, टैब और लेपटॉप की दरों में कमी आई है, उधर प्रतिव्यक्ति आय बढ़ी तो डिज़िटल इण्डिया के प्रयोगकर्ता अथवा लोगों ने अपनी राशि इन संयन्त्रों की ख़रीदी में लगाई जिससे सोशल मीडिया में सीधा प्रभाव पड़ा और लोगों की भागीदारी इन्टरनेट के माध्यम से इन्टरनेट पर बढ़ गई। सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विश्व की कई साफ्टवेयर कंपनियों जिसमें गूगल अग्रणीय है, कई ऐसे टूल भी बनाए गए हैं, जिसके कारण उपयोगकर्ताओं को बहुत अधिक मात्रा में लाभ पहुंचा है जैसे- कई भाषाओं और उनकी लिपियों में अनुवाद के लिए कई टूल, विभिन्न लिपियों में अपनी भाषा में संदेश भेजने के लिए टाइपिंग टूल, फॉन्ट कन्वर्टर, ई-मेल का अधिक लिपयों में उपलब्ध होना, ब्लॉग निर्माण भारतीय और विदेशी लिपियों में निर्मित हो पाना, कई भाषाओं की लिपियों में सर्च इंजन का निर्माण, मोबाइल टी. वी., हॉट स्टार, समाचार के सीधे प्रसारण के एप्स, लिखित समाचार एप्स, मोबाइल पर स्काइप, वॉइस रिकार्डर, टेक्स्ट टू स्पीच, स्पीच टू टेक्स्ट, गूगल मैप, गूगल अर्थ, विभिन्न भाषाओं और लिपियों के शब्द कोश, विभिन्न भाषाओं और लिपियों में गेम्स एप्स, यू ट्यूब, गूगल प्लस, फ़ाइल ट्रांसफ़र एप्स, फ़ाइल रक्षण और रीडिंग एप्स, मनोरंजन, ज्ञानात्मक साहित्य, रिचार्ज एप्स, राशि ट्रांसफर, ई-भुगतान, खोजी और सूचनात्मक एप्स, जॉब एप्स इत्यादि से कई स्तरों पर नयापन, सहजता और सुविधा से डिज़िटल इण्डिया और डिज़िटल भारत के लोगों को प्राप्त हो पा रही है। डिज़िटल इण्डिया की संकल्पना ने सोशल मीडिया में एक बहुत बड़ी क्रांति ला दी है, जिसके कारण रोज़ नई-नई आवश्यकताएँ जन्म ले रही हैं और नई-नई खोजें, उपक्रम, संयंत्र सामने आ रहे हैं। डिज़िटल इण्डिया का सीधा प्रभाव मनोरंजन जगत पर पड़ा है जिसके कारण दृश्य, श्रव्य, दृश्य-श्रव्य और प्रिंट सोशल मीडिया भी अपनी गुणवत्ता के साथ समाज में उपास्थि हो पाया है। फ़िल्मों का डिज़िटलाइज़ेशन होने के कारण अब डिज़िटल प्रणाली और रूप समक्ष आया है, जिससे गुणवत्ता में वृद्धि के साथ व्यवसाय में भी वृद्धि हो रही है। अब समाज में व्यक्ति अपने मनोरंजन को बेहतर उपायों के साथ ग्रहण कर रहा है और लाभ प्राप्त कर रहा है। वह थ्री डी इफ़ेक्ट के साथ फिल्म देखना अधिक पसंद कर रहा है। डिज़िटलाइज़ेशन के कारण ऑडियो-वीडियो की दुनिया की गुणवत्ता में बहुत सुधार हुआ है, जिसका लाभ वर्तमान जनता बहुत कम दामों पर, फ्री या डाउनलोड के माध्यम से ले रही है। समाज एस. डी. कार्ड का इस्तेमाल करते हुए बेहतर तरीके से वीडियो देखते हुए ऑडियो का का निकटतम वैयक्तिक एकल लाभ ले पा रहा है। केवल ऑडियो में भी बेहतर क्वालिटी का साउंड डिज़िटलाइज़ेशन के कारण संभव हो पाया है। इधर टी. वी. में डिज़िटलाइज़ेशन के कारण कई चैनल का प्रसारण विभिन्न भाषाओं में एक साथ होना संभव हुआ है, डी टू एच और सेटअप बॉक्स की डिज़िटल तकनीक के आने के कारण एक ओर सरकार भी लाभान्वित हुई है, तो दूसरी ओर लोगों को विविधता के साथ मनोरंजन के साथ सूचनात्मक, ज्ञानात्मक लाभ घर बैठे प्राप्त हो रहा है। भारत में टी. वी. के डिज़िटलाइज़ेशन होने से डिज़िटल इण्डिया के साथ डिज़िटल भारत भी बराबर लाभ ग्रहण कर पा रहा है। वर्त्तमान में सरकार की ऐसी योजना है, जिसके तहत दूरदर्शन के 8 चैनल का ऐसा प्रसारण किया जाएगा जो मोबाईल में सीधे देखे जा सकेंगे उसके लिए कोई शुल्क या इंटरनेट सुविधा की कोई आवश्यकता न होगी। जैसे रेडियो को मोबाईल में सुना जाता है, वैसे ही अब ये चैनल भी सीधे देखे जा सकेंगे। डिज़िटलाइजेशन के कारण सामूहिक कान्फ्रेंस, संवाद, बहस इत्यादि का संभव हो पाया है अब किसी भी मुद्दे पर बात, मताभिव्यक्ति अलग-अलग देशों में स्थानों पर बैठे व्यक्ति के साथ उसी समय जोड़कर की जा सकती है। जिससे समय की बचत के साथ आवागमन की असुविधा समाप्त हो पाई है और संवाद के आदान-प्रदान के साथ ज्ञान का भी प्रसार हुआ है। दिनांक 10 जनवरी 2016 को प्रधान मंत्री ने जैन आचार्य विजयरत्न सुंदर सुरीश्वर द्वारा रचित 300 वीं पुस्तक ‘मारू भारत सारू भारत’ का विमोचन डिज़िटलाइजेशन के तहत वीडियो कान्फ्रेंस से किया। इसके अतिरिक्त चिकित्सा क्षेत्र, अनुसंधान क्षेत्र में इस डिज़िटलाइजेशन का बहुत अधिक लाभ समाज को पहुँच रहा है। दिनांक 15 जनवरी 2016 को मोबाईल फोन पर एक स्वास्थ्य सुविधा और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के लिए ई-सुविधा को प्रारम्भ किया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति बिमारी से सम्बंधित समस्याओं और निदान को आसानी से प्राप्त कर सकता है। आर्थिक क्षेत्र में भी डिज़िटलाइज़ेशन का बहुत बड़ा योगदान है, इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा इस क्षेत्र में बहुत अधिक कारगर सिद्ध हुई है, जब चाहो जहाँ चाहो तुरंत भुगतान किया जा सकता है। अब तो मोबाईल बैंकिंग का ज़माना है तुरंत भुगतान के साथ राशि ट्रांसफर की सुविधा बहुत लाभदायक सिद्ध हो रही है। विभिन्न भाषाओँ और लिपियों में बैंक द्वारा दी जा रही sms सुविधा भी अपने बैंक खाते की जानकारी को सीधे लोगों तक पहुंचा रही है, अब अपने अकाउंट की स्थिति की जानकारी के लिए बैंक तक जाने की कोई ज़रूरत नहीं। पहले पहल ATM के आने पर उपयोगकर्ताओं तथा ग्राहकों को बहुत सुविधा मिली थी, परन्तु अब आवर बी सुविधा डिज़िटलाइज़ेशन के कारण मिल रही है। आगे और भी क़दम ई-कॉमर्स के माध्यम से उठाए जाने वाले हैं। अंतरिक्ष के क्षेत्र में डिज़िटलाइज़ेशन ने पहले के मुकाबले बहुत अधिक विकास किया है, अंतरिक्ष के अनुसंधान में इस तकनीक का बहुत अधिक लाभ निरंतर मिलता जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज ‘नरेन्‍द्र मोदी मोबाइल ऐप्‍प’ प्रारंभ किया। यह एप्लिकेशन श्री नरेन्‍द्र मोदी के रोजमर्रा के कार्यकलापों की जानकारी उपलब्‍ध कराता है। यह एप्लिकेशन श्री नरेन्‍द्र मोदी की ओर से सीधे संदेश और ई-मेल प्राप्‍त करने का अवसर प्रस्‍तुत करता है। इसमें ‘टू डू टास्‍क्‍स’ के माध्‍यम से योगदान देने और बैज हासिल करने का विकल्‍प भी उपलब्‍ध है। इस एप्लिकेशन के जरिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के ‘मन की बात’ संस्‍करणों में से कोई भी संस्‍करण सुना जा सकता है, उनके ब्‍लॉग्‍स को पढ़ा जा सकता है और जीवनी खण्‍ड से उनके बारे में अतिरिक्‍त जानकारी प्राप्‍त की जा सकती है।

भारत में डिज़िटलाइज़ेशन के और अधिक विस्तार के लिए दिनांक 18 जनवरी 2016 को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इज़राइल के साथ एक प्रस्ताव पर पहल करते हुए इस क्षेत्र में आपसी सहयोग आदान-प्रदान हेतु कदम बढ़ाया है। शिक्षा क्षेत्र में भी अब सभी फार्म ऑनलाइन भरे जाने लगे हैं, चाहे वह पूर्व परीक्षा हो, एडमिशन हो, छात्रवृत्ति हो या अन्य कोई परीक्षा हो सभी को ऑनलाइन किया गया है। अब कक्षा में विद्यार्थियों की उपस्थिति और शिक्षकों की उपस्थिति भी डिज़िटल हो गई है। रेलवे स्टेशन पर आरक्षण की स्थिति के लिए लगा उपकरण यात्रियों को दी जाने वाली डिज़िटल सुविधा है और विश्वविद्यालयों में लगा उपकरण का भी विद्यार्थी लाभ ले रहे हैं अपना परीक्षा परिणाम सरलता से देख सकते हैं। यह सब डिज़िटलाइज़ेशन सहायता से संभव हो पा रहा है और इसमें सोशल मीडिया की अहम भूमिका है। इधर रेडियो में एफ़. एम. चैनल के प्रारम्भ हो जाने से कई प्राइयवेट रेडियो चैनल प्रारम्भ हुए, जो एक साथ मनोरंजन, विज्ञापन, समाचार, सूचना, जनजागृति, वैश्विक जागरण तथा व्यक्ति के सामाजिक दायित्व का निर्वाह कर रहे हैं। विविध भारती जैसी महत्त्वपूर्ण रेडियो सेवा जो पहले रेडियो में शॉर्ट वेव, मीडियम वेव पर ही उपलब्ध थी, अब वह भी एफ़. एम. के माध्यम से उपलब्ध होने से देश और समाज को बहुत अधिक मात्रा में गुणवत्तायुक्त लाभ पहुँचने लगा है। रेडियो के माध्यम से ही अब पुनः सभी भाषाओं के साहित्य को व्यापक स्तर पर समाज से सीधे जोड़ा जा रहा है, विविध भारती से तो साहित्यिक कार्यक्रम वर्षों से नाटकों और उपन्यासों को ध्वन्यात्मक रूप में ‘नाट्य तरंग’, ‘हवा महल’ आदि कार्यक्रमों के तहत प्रसारित किया जा रहा है, लेकिन अब एफ़. एम. गोल्ड, एफ़. एम. रेनबो और भी आकाशवाणी के कई क्षेत्रीय चैनलों से हिन्दी तथा अन्य भाषाओं की कहानियों का गीतों के साथ मिश्रण करके साहित्य को प्रसारित किया जा रहा है। रेडियो अब एक छोटी से चिप में परिवर्तित हो गया है और अब मोबाइल में उपलब्धि के कारण डिज़िटल भारत का अहम हिस्सा बन गया है, अब अलग से रेडियो साथ रखने की कोई आवश्यकता नहीं रहा गई है। अब रेडियो टी.वी. के समय के साथ रेडियो का लाभ प्रधानमंत्री अपने जन कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से सीधे जनता से जुड़ गए हैं। अभी तक प्रधाना मंत्री ने 13 बार ‘मन की बात’ द्वारा अपना संदेश राष्ट्र को दिया और यह संदेश हिन्दी भाषा में दिया पश्चात में भारत की सभी भाषाओं में अनुवाद करके प्रसारित किया गया। इसे प्रधानमंत्री के एप्स पर भी कभी भी सूना जा सकता है। रेडियो एक सूक्ष्म इलेक्ट्रोनिक यंत्र के रूप मे उपलब्ध होने के साथ इन्टरनेट से भी जुड़ गया है। मोबाइल पर भी अब इन्टरनेट के माध्यम से रेडियो को सुना जा सकता है, इसके अतिरिक्त विश्व के केई विदेशी चैनल जो विदेशी भाषाओं में उपलब्ध होने के साथ विदेशों में हिन्दी चैनल भी इन्टरनेट के माध्यम से उनकी साइट सुने जा सकते हैं। अभी हाल ही में देश में आकाशवाणी के और भी रेडियो चैनल का प्रारम्भ हुआ है और विविध भारती सेवा ने २६ जनवरी २०१६ को नया रेडियो चैनल ‘रागम’ प्रारम्भ किया है, जिसमें २४ घंटे शस्त्रीय संगीत का आनंद उठाया जा सकता है। डिज़िटलाइज़ेशन के कारण प्रिंट मीडिया की गुणवत्ता में सुधार के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान की तीव्रता में भी निरंतर वृद्धि हुई है। अब इन्टरनेट की सहायता लेते हुए, कोई समाचार, कोई लेख, कोई तथ्य सीधे समाज को शीघ्रता से मिल पा रहा है। यह उस समाज के लिए बहुत लाभदायक है जो डिज़िटल भारत का भी हिस्सा नहीं है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में है, जो ऐसे क्षेत्रों में है जहां आज भी बिजली के तार नहीं पहुँच पाए हैं। डिज़िटलाइज़ेशन के कारण ही छपाई के यंत्रों में बदलाव आए हैं अब जो नए यंत्र हैं वी इलेक्ट्रोनिक पद्धति पर आधारित है, जो और भी बेहतर गुणवत्ता की छपाई के साथ रंगों के प्रयोग के साथ चित्रों की क्वालिटी में भी प्रिंट मीडिया को लाभ पहुंचा रहा है। अपनी गुणवत्ता में निरंतर वृद्धि करते हुए प्रिंट मीडिया ने अपने व्यवसाय की निरंतर बढ़ाया है और लाभ प्राप्त किया है। केवल यह लाभ प्रिंट मीडिया को प्राप्त हुआ हो ऐसा नहीं, बल्कि देश, समाज के नागरिकों को भी सीधा लाभ पहुंचा है, जो कि डिज़िटल भारत का हिस्सा हैं भी और नहीं भी।

डिज़िटलाइज़ेशन के क्षेत्र में एक बहुत बढ़ा कदम भारत ने दिनांक 16 जनवरी 2016 को उठाते हुए ‘स्टार्ट अप इण्डिया’ कार्यक्रम का प्रारम्भ किया है। इसके तहत ऑनलाइन एक ऐसा मार्किट तैयार होगा जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्र में कम्पनियाँ अपनी सेवाएँ देते हुए व्यापक स्तर पर अपना प्रचार करेंगी साथ ही आर्थिक स्तर पर निवेश के बहुत अधिक क्षेत्र खुलकर समाने आएँगे साथ ही रोज़गार की संभावनाओं के बहुत अधिक अवसर युवाओं के सामने आएँगे। सरकार ने इसके आव्हान हेतु कई इस क्षेत्र से जुड़ने वालों को बहुत सी सुविधाओं की भी घोषणा की है। इस कार्यक्रम की सफलता के लिए पूरे भारत से सहयोग की अपेक्षा की जा रही है, बड़ी कंपनियों के निवेश के साथ स्कूलों के विद्यार्थियों को कई स्तर पर जोड़ा जाएगा। स्टार्ट अप के मामले में भारत अमेरिका और ब्रिटेन के बाद तीसरे क्रमांक पर है। स्टार्ट अप के मामले में विश्व बाजार में भारत की स्थिति निरंतर बेहतर होती जा रही है, भारत अब व्यावासाय करने के नजरिए से दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल होने की ओर है। कई ऐसी कंपनियां भी हैं जो विदेशों को छोड़कर भारत आ रही हैं। इस दौर में कई ऐसी कंपनियां भी हैं जो विदेशों को छोड़कर भारत आ रही है। यह स्पष्ट हुआ है कि ट्विटर जिपडॉयल के फाउंडर वेलरी वेगनर ने अमेरिका छोड़कर भारत में काम शुरू किया। वहीं जूमकार के को-फाउंडर ग्रेग मोरान ने जानी-मानी सिलिकॉन वैली को छोड़ कर, अपना कारोबार भारत में बंगलूरू में शुरू किया। केवल इतना ही नहीं कुल विदेशी कंपनियों मे से 45 फीसदी कंपनियां ऐसी भी हैं जो भारत में 10 फीसद का स्टार्ट अप डाल देते हैं। यदि इस सम्बन्ध में आकलन करें और स्टार्टअप के मामले में भारत की स्थिति का मूल्यांकन करें तो यहां हालात ठीक-ठाक दिखते हैं। ‘ट्रैकर सीबी इनसाइट’ के मुताबिक ‘यूनिकॉर्न क्लब’ के भीतर दुनिया की 107 ग्लोबल फर्मों में आठ भारतीय कंपनियां शामिल हो चुकी हैं। ये कंपनियां 1 अरब डॉलर से ज्यादा की इन कंपनियों में फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, म्युसिग्मा, हाऊसिंग डॉट कॉम, क्लियर ट्रिप, ओला भी शामिल हैं। इनके अलावा ऑनलाइन क्लासीफाइड सर्विस कंपनी ‘क्विकर’ और मोबाइल विज्ञापन प्लेटफॉर्म देने वाली कंपनी ‘इनमोबी’ भी इस क्लब में शामिल हैं। इन स्टार्ट अप्स की मदद से अगले 5 साल की 3 लाख नौकरियों के खड़े होने की उम्मीद है। वहीं नैस्कॉम का मानना है कि 2020 तक 11,500 स्टार्ट अप शुरू होंगे। स्टार्ट अप के जरिए भारत ने 240 करोड़ डॉलर की फंडिंग आकर्षित की है। भारत में स्टार्ट अप का ग्राफ साल-दर साल बढ़ता जा रहा है। साल 2010 में देश में जहां मात्र 480 स्टार्ट अप थे वहीं 2011 में यह संख्या बढ़कर 525 हो गई थी। 2012 में 65 स्टार्ट अप का इजाफा हुआ, जिसके बाद कुल 590 स्टार्ट अप हो गए। 2013 के भीतर भारत में स्टार्ट अप की संख्या 680 हो गई। 2014 में जहां स्टार्ट अप की संख्या 805 तक पहुंच गई वहीं इसकी मदद से 65,000 लोगों को रोजगार मिला। 2015 में स्टार्ट अप की संख्या बढ़कर 1200 हो गई जिसके माध्यम से 80,000 लोगों को रोजगार मिला। साल 2015 में भी कई ऐसे स्टार्टअप शुरू हुए जिन्होंने खासी प्रसिद्धि पाई। जिनमें क्राउड फायर, प्राइस बाबा, रिक्रूटमेंट एप ‘सुपर’ और विजरॉकेट शामिल है। बताते चले कि क्राउडफायर ट्विटर व इंस्टाग्राम का फ्रैंड मैनेजमेंट एप है। इसके जरिए इंटरप्राइजेस अपने असक्रिय फॉलोअर्स को ट्विटर पर देख सकते हैं। यह कई सेवाएं देता है, जिसके दुनिया में 80 लाख यूजर्स हैं। कंपनी का रेवेन्यू 6 करोड़ रु. को पार कर चुका है। प्राइस बाबा एक लोकल प्रोडक्ट सर्च इंजन है। यह ग्राहकों का स्थानीय व ऑनलाइन रिटेलर्स के साथ संपर्क करने में मदद करता है। इसमें बेहतर ढंग से कीमतों की तुलना करते हुए किफायती चीजों की जानकारी ले सकते हैं। बड़े स्टार्ट अप में शामिल रिक्रूटमेंट एप ‘सुपर’को हाल ही में वायरलट्रिक्स ने खरीदा है। इसका मकसद नौकरी के इच्छुक लोगों को कंपनियों से जोड़ना है। अब तक 5 लाख लोग इसमें पंजीकृत हो चुके हैं। इसी सूची में शामिल विजरॉकेट यूजर के व्यवहार का विश्लेषण करने वाला उपकरण देता है। इससे न केवल शॉपिंग के नोटिफिकेशन को हासिल किया जा सकता है। नया कारोबार प्रारम्भ करने के लिए इस महत्त्वकांक्षी योजना ने नए भारत के निरमान की पहल कर दी है, यह योजना जनता के हित में देखी जा रही है इससे तय होगा कि लोग तकनीक के माध्यम से अपना व्यापर-व्यवसाय कर सकेंगे। लेकिन ये है कड़वी सच्चाई लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी एक स्टार्ट अप के सामने कई विफलताए हैं। फार्च्यून द्वारा किए गए एक सर्वे में स्टार्ट अप की विफलता के कारण गिनाए गए हैं। इस सर्वे के मुताबिक 100 में से 90 स्टार्ट अप विफल रहते हैं, वहीं 42 फीसदी स्टार्ट अप ऐसे होते हैं जिनके प्रोडक्ट की बाजार में जरूरत ही नहीं थी। इन विफलताओं के बावजूद भी भारत में स्टार्ट अप के हालात बेहतर है। स्टार्ट अप इण्डिया वास्तव में स्टैंड अप इण्डिया बनाने के स्वप्न हैं जिसके तहत भारत का प्रत्येक क्षेत्र में विकास किया जाएगा। वास्तव में डिज़िटल इण्डिया का भविष्य अनुसन्धान और रचनात्मकता में है, इस हेतु कई सकारात्मक योजना के साथ खुलेपन को महत्त्व दिया जा रहा है। यह सब कारोबार के नवीन उपाए हैं, जो डिज़िटलाइज़ेशन के माध्यम से संभव हो पाएगा। यह नया उपक्रम बिना किसी लैंगिक अंतर के प्रारम्भ हो रहा है, खासकर महिलाओं को आगे लाने की भी योजना है। फिर भी कई चुनौतियाँ हैं जिसे डिज़िटल इण्डिया को समझना होगा और डिज़िटल भारत को साथ में लेकर चलना होगा। 

वास्तव में डिज़िटल इण्डिया तब डिज़िटल इण्डिया कहलाएगा जब समता, समत्व और समविकास करते हुए जीवन के उस संघर्ष से भारत के हर व्यक्ति को बाहर निकाल लाये, जो जीवन की आधारभूत सुविधाओं के लिए निरंतर संघर्ष कर रहा है। हरेक व्यक्ति तक यह समस्त सुविधाएं सामान्य शुल्क पर उपलब्ध कराई जाएँ, जिससे डिज़िटल इण्डिया और डिज़िटल भारत का आशंकित भेद समाप्त किया जा सके। हर तबके का नागरिक सामान्य रूप में इन ई-सुविधाओं का लाभ ग्रहण कर सके जो एक मज़बूत आर्थिक स्तर का व्यक्ति कर रहा है। इस समत्व के लिए सरकार को बहुत सी आवश्यक सेवाएँ शुल्क मुक्त रखना होंगी खासकर वाई फ़ाई सुविधा आम आदमी को फ़्री दी जाए तो हर कोई इस डिज़िटल इण्डिया का हिस्सा बन पाएगा, जहां किसी भी प्रकार का कोई भेद न होगा। लेकिन आर्थिक स्तर पर यह कितना लाभदायक या नुकसान दायक है, इस बात पर अलग से विचार करने की आवश्यकता बन जाती है। लेकिन ई-क्रान्ति तो तब ही संभव हो पाएगी जब भारत का हर नागरिक चाहे वह किसी भी समुदाय का क्यों न हो वह इसका उपयोगकर्ता बने और इससे लाभ ग्रहण कर सके वरना ऐसी ई-क्रान्ति की सार्थकता कम मानी जाएगी। डिज़िटल भारत को डिज़िटल इण्डिया बनाने के लिए कई प्रकार की जड़ताओं, बाधाओं को तोड़ना होगा और साथ ही कई प्रकार की आर्थिक, राजनीतिक चुनौतियों का सामना करते हुए हर स्तर पर डिज़िटलाइज़ेशन को लोकतान्त्रिक बनाते हुए आम नागरिक को हर स्तर पर इससे जोड़ना होगा। डिज़िटल भारत को डिज़िटल इण्डिया में परिवर्तित करने के लिए उसके जैविक स्तर को ऊँचा उठाना होगा साथ ही जीवन की आधारभूत सुविधा रोटी, कपड़ा और मकान को प्राथमिक आवश्यकताओं में सम्मिलित कतरते हुए उसकी उपलब्धता पर पहले गहरे से विचार कर समस्याओं से निबटना होगा। केवल डिज़िटल क्षेत्र में विकास करते हुए भारत को प्रगतिशील और विकासमान स्वीकार कर लेना एकांगी मत होगा, कारण इसका यह है कि जबतक कोई राष्ट्र अपना विकास, उन्नति प्रत्येक स्तर पर नहीं हांसिल कर लेता है तबतक उसकी वास्तविक प्रगति मानी ही नहीं जा सकती है। इसलिए भारत के सामने एक बहुत ही संतुलित ढंग से विकास की योजना होनी चाहिए जिसमें मानवीय विकास के लिए प्रत्येक क्षेत्र का विकास जुड़ा हो जो भारत को उन्नति के शिखर पर ले जाये। विकास की दिशा को असंतुलन से बचाना होगा साथ है साथ डिज़िटल भारत के लिए ऐसी परियोजनाओं का निर्माण करना होगा जिसमें किसी भी प्रकार का कोई भेद या अंतर डिज़िटल इंडिया के साथ न हो जहाँ सबके साथ बराबर की साझेदारी हो आवर सब एक साथ इस दिशा में आगे बढ़ते हुए भारत को डिज़िटल भारत में तब्दील कर सकें। 



डॉ. मोहसिन ख़ान 
हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं शोध निर्देशक
जे.एस.एम. महाविद्यालय,
अलीबाग-402 201 
ज़िला- रायगड़ (महाराष्ट्र)
मोबाइल-09860657970



[चित्र साभार: http://www.indiandefensenews.in/2015/07/economy-industry-throws-its-weight.html]       
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