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कौन कहता है कि साहित्य का फूल ग्रामों में नही पलता,

कौन कहता है कि साहित्य का फूल ग्रामों में नही पलता, नहीं खिलता। कलकत्ता के उनगरिय शिल्पांचल के एक ग्रामांचल 'गौरीपुर" के गरिफा मैत्रेयी ग्रंथागार में मुंशी प्रेमचंद जी के जयंती समारोह का आयोजन किया गया।कहा जाता है कि साहित्यिक जुनून सिर्फ साहित्य प्रेमियीं में ही देख जा सकता है,वह आज देखने को मिला।रिमझिम बारिश,पानी से भरे लबालब सड़कों को पार करते हुए समस्त साहित्य प्रेमी उपस्थित हुए।कार्यक्रम आयोजक डॉ इंदु सिंह एवं डॉ विक्रम इस आयोजन  के लिये सराहना के पात्र हैं। कार्यक्रम में प्रेम चंद जी के साहित्य सुधा की ऐसी रसधारा बही जिसका उल्लेख शब्दों में कर पाएं सम्भव नहीं। मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती माला वर्मा,कल्याणी विध्वविद्यालय के डॉ. श्रीकांत गोंड, ऋषि बंकिम चंद महिला महाविद्यालय(womens कॉलेज) के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष श्री एन. चंद्रा राव,रिसड़ा के साहित्य प्रेमी श्री चंद्र कुमार मुखर्जी,श्री धर्मदेव सिंह,श्रीमती आरती वर्मा उपस्थित थे। इनके अतिरिक्त विभिन्न विद्यालयों/महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।सबसे कम उम्र के वक्ता कक्षा सातवीं के छात्र हैं। विभिन्न वक्ताओं के विचार एवं आख्यान के बीच श्रीमती माला वर्माजी की नवीनतम रचना *विश्व के 20 आश्चर्य* का लोकार्पण हुआ। डॉ. इंदु सिंह एवं डॉ. विक्रम इस प्रकार के साहित्य जागरण पिछले सात वर्षों से करते आ रहे हैं।जिनके कार्यक्रमों की मुख्य खासियत है ये स्कूल और कॉलेज के युवाओं में साहित्य प्रेम का संस्कार डालने का प्रयास कर रहे हैं।


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