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‘‘साहिबां तूं माडी कीती नीं जे पता हुदा तूं इंज करनी मैं लयोंदा नाल भरावां नूं’’ (पंजाबी किस्सा काव्यों के स्त्री प्रशन और पंजाब में स्त्री की स्थिती ):  हरप्रीत कौर