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गुरुवार, 29 सितंबर 2016

अजय रोहिल्ला की कविताएँ


अजय रोहिल्ला की कविताएँ

कागज़ नहीं
कलम नहीं
लिखनी है कविता
ना हो कागज़ ना हो कलम
तो बोलो
बोलो जुबां से
और गर काट ली जाए जुबां
तो कहो आँखों से
और गर ना हो आँखें
तो भी कहो
कहो ह्रदयगति से
यकीं करो मेरा
कविता सुनी जायेगी
और न केवल सुनी जायेगी
समझी भी जाएगी समय आने पर
...........................................................
नारे ,नारे और नारे
नारे इधर भी और नारे उधर भी
नारों की दुनिया
खाओ ,पियो,पहनो ,ओढो नारे
नारों की दुनिया में भूल जाओ सब कुछ
बस ज़ोर ज़ोर से लगाओ नारे
इसके नारे ,उसके नारे ,सबके नारे
गुस्सा करते नारे ,प्यार जताते नारे
सड़क पर नारे ,संसद में नारे
शोर मचाते नारे
सुनो, सुनाओ नारे
नारे ही नारे
नारे बेरोज़गारी पर
नारे गरीबी पर
नारे रोटी,कपडा ,मकान पर
नारे शिक्षा पर
नारे धर्म पर
नारे अधर्म
जब चाहिए जैसे चाहिए
हाज़िर हैं नारे
खो रहा हूँ मैं
खो रहे हो तुम
खो रहें हम सब
नारों के शोर में
ना ,ना चिंता ना करो अछूता कोई नहीं
नारों के जाल से ....

 


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