Ticker

6/recent/ticker-posts

श्रम और प्रांत (1 मई का विशेष संदर्भ): डॉ. मोहसिन खान


श्रम और प्रांत (1 मई का विशेष संदर्भ)
-----------------------------------------
श्रम

वर्तमान जगत की समस्त प्रगति और विकास श्रम से प्रादुर्भूत तथा स्थापित है। प्रत्येक समाज की संरचना में श्रम-संस्कृति का योगदान अपनी प्रमुखता से विराजित हैं। इसी श्रम संस्कृति के कारण ही समाज की संरचना, प्रगति संभव हो सकी है। यह श्रम की महत्ता ही है जिसने आज विश्व निर्माण में अपनी महती भूमिका का निर्वाह करते हुए हर एक व्यक्ति को जीवन  जीने की सुख सुविधाएं प्रदान की हैं। जब से जगत में मनुष्य की उत्पत्ति हुई है, तब से मनुष्य श्रम के माध्यम से ही प्रत्येक चीज का निर्माण करता रहा है, इसलिए आज समाज में श्रम की सबसे अधिक महत्ता है। अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस को मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है जब अमरीका की मज़दूर यूनियनों ने काम का समय 8 घंटे से ज़्यादा न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। इसी प्रचलन में लगातार अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस विश्व में मनाया जा रहा है। हर वर्ष  अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस की थीम अलग-अलग रहती है। 1 मई को मजदूर दिवस पर श्रम से मजदूरों का अवकाश रहता है, परंतु भारत जैसे देश में मजदूरों के बीच शिक्षा के अभाव और सही जागरूकता, नेतृत्व के अभाव के कारण मजदूर इस दिन भी मजदूरी करते हैं और उन्हे पता ही नहीं होता कि अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस क्या है? इसका मजदूर से क्या संबंध है? मजदूरों की दयनीय और शोचनीय अवस्था भारत में खुले रूप में देखी जा सकती है, सस्ते दामों पर मजदूर की उपलब्धता के साथ असंगठित मजदूर वर्ग शोषण का शिकार निरंतर हो रहा है। बाल श्रम की बढ़ती अवस्था भी भारत में निरंतर देखने को मिलती है। जबकि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को मजदूर के रूप में कोई अपने यहाँ नहीं रखा सकता है, लेकिन लचर कानून व्यवस्था, असंतुलित सामाजिक व्यवस्था और गरीबी के कारण बाल मजदूरों की संख्या में इजाफा ही हुआ है कोई भी रोक न लग पाई है। लोगो का भारत में मजदूरों के प्रति भेदभाव भी देखा जाता है पुरुष मजदूर को अधिक रुपयों की मजदूरी प्राप्त होती है जबकि स्त्री मजदूरों को कम रुपयों की मजदूरी प्राप्त होती है यह असमानता और भेद लिंग भेद पर ही आधारित नजर आता है। 
----------------------------------------
©डॉ. मोहसिन ख़ान
----------------------------------------
महाराष्ट्र राज्य
महाराष्ट्र स्थापना दिवस  भी 1 मई को मनाया जाता है। देश की आज़ादी के बाद मध्य भारत के सभी मराठी भाषा के स्थानों का समीकरण करके एक राज्य बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन चला और 1 मई, 1960 को कोंकण, मराठवाडा, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) तथा विदर्भ, सभी संभागों को जोड़ कर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई। महाराष्ट्र राज्य का गठन देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आस-पास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया था, जो पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में था। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का ज़िला, हैदराबाद के निज़ाम की रियासत के पांच ज़िले, मध्‍य प्रांत (मध्य प्रदेश) के दक्षिण के आठ ज़िले तथा आस-पास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती ज़िलों में मिल गई थी। शुरू में महाराष्ट्र में २६ जिले थे। उसके बाद १० नये जिले बनाएँ गये है। वर्तमान के महाराष्ट्र में ३६ जिले है। इन जिलों को छह प्रशासनिक विभागों में विभाजित किया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या की दृष्टि से देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, 2011 के अनुसार जनसंखाया 112,374,333 है। महामहिम राज्यपाल कातीकल शंकरनारायणनन तथा मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फड़नवीस हैं। महाराष्ट्र पश्चिम में अरब सागर से, उत्तर-पश्चिम में गुजरात से, उत्तर में मध्य प्रदेश से, दक्षिण में कर्नाटक से और पूर्व में छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से घिरा है। महाराष्ट्र का कुल क्षेत्रफल 3,07,713 वर्ग किमी. है। लगभग 80% साक्षारता की दर यहाँ पर है। लगभग 1000 पुरुषों पर 925 महिलाए हैं।  अपनी स्थापना से वर्तमान तक की प्रगतिपूर्ण यात्रा में महाराष्ट्र भारत में सबसे अधिक प्रगतिशील और विकासशील प्रांत माना जा रहा है। जहां महाराष्ट्र में अपनी लोक संस्कृति की अनूठी पहचान और विशिष्ट भाषा है, वहीं यह आर्थिक स्तर पर अत्यंत समृद्ध नजर आता है। भारत की आर्थिक स्थिति को को देखते हुए मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी का दर्जा प्राप्त हुआ है। समुद्री तट होने के कारण यहां से सामुद्रिक व्यापार की अच्छी खासी प्रगति की जा चुकी है और व्यापार में अंतरराष्ट्रीय मार्का बन चुका है। आज महाराष्ट्र ऊर्जा, उत्खनन, रेलवे, परमाणु अनुसंधान, उच्च शिक्षा, खेलकूद, मनोरंजन, स्वास्थ्य सेवाओं, विमान सेवाओं, सैन्य बल, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्थिक क्षेत्र, पर्यटन,संचार साधनों, रोजगार क्षेत्र में देश का प्रतिनिधि राज्य माना जाता है।
----------------------------
©डॉ. मोहसिन ख़ान
----------------------------------------------------------------
गुजरात

गुजरात (गुजराती:ગુજરાત)(/ˌɡʊdʒəˈrɑːt/) पश्चिमी भारत में स्थित एक राज्य है। इसकी उत्तरी-पश्चिमी सीमा जो अन्तर्राष्ट्रीय सीमा भी है, पाकिस्तान से लगी है। राजस्थान और मध्य प्रदेश इसके क्रमशः उत्तर एवं उत्तर-पूर्व में स्थित राज्य हैं। महाराष्ट्र इसके दक्षिण में है। अरब सागर इसकी पश्चिमी-दक्षिणी सीमा बनाता है। इसकी दक्षिणी सीमा पर दादर एवं नगर-हवेली हैं। इस राज्य की राजधानी गांधीनगर है। गांधीनगर, राज्य के प्रमुख व्यवसायिक केन्द्र अहमदाबाद के समीप स्थित है। गुजरात का क्षेत्रफल १,९६,०७७ किलोमीटर है।

गुजरात, भारत का एक राज्य है। कच्छ, सौराष्ट्र, काठियावाड, हालार, पांचाल, गोहिलवाड, झालावाड और गुजरात उसके प्रादेशिक सांस्कृतिक अंग हैं। इनकी लोक संस्कृति और साहित्य का अनुबन्ध राजस्थान, सिंध और पंजाब, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के साथ है। विशाल सागर तट वाले इस राज्य में इतिहास युग के आरम्भ होने से पूर्व ही अनेक विदेशी जातियाँ थल और समुद्र मार्ग से आकर स्थायी रूप से बसी हुई हैं। इसके उपरांत गुजरात में अट्ठाइस आदिवासी जातियां हैं। जन-समाज के ऐसे वैविध्य के कारण इस प्रदेश को भाँति-भाँति की लोक संस्कृतियों का लाभ मिला है।
©विकिपीडिया से साभार
-----------------------------------------
डॉ. मोहसिन ख़ान
जय हिन्द!!!

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां

सबस्क्राईब करें

Get all latest content delivered straight to your inbox.